यह पुस्तक एक तरह से लेखक का आत्म-साक्षात्कार है। इस पुस्तक में लेखक ने अपनी
पहचान की है, साथ ही अपने समकालीन साहित्यकारों, चित्रकारों, आलोचकों की भी-अपनी
विशिष्ट शैली, में, अपने ही अंदाज में।
लेखक अपनी रचनाओं में जीता है, उन्हीं, से पहचाना जाता है। इस पुस्तक में वैद जी ने
अपने विशिष्ट कृतियों के बारे में भी लिखा है। पुस्तक कब लिखी, क्यों लिखी, किसकी
प्रेरणा से-ये सब दिलचस्प पहलू हैं जिन्हें पाठक जानना चाहेंगे। पढ़िए और सराहिए।