Kya Khoya Kya Paya
Kya Khoya Kya Paya
MRP: ₹265
₹253
₹ 12 Off
(Incl. of all taxes)
Qty
Buying in bulk?
In stock
Deliver to
  • 7-day returns
  • Secure payment
  • International shipping
  • Carefully packed
Get this at ₹ 240Extra 5% OffAdd items worth ₹999 to the cart & get extra 5% off
Get this at ₹ 228Extra 10% OffAdd items worth ₹1499 to the cart & get extra 10% off
Book Summary
"राजनीति ने अटलजी की काव्य रसधारा को भले अवरूद्ध किया हो लेकिन काव्य ने उनकी राजनीति को बड़ी गहरी संवेदना से सँवारा है। दोनों के समन्वय को देखने-परखने की उनकी दृष्टि बिल्कुल साफ है। इतना ही नहीं, वे साहित्य को अधिनायकवादियों तक पर अंकुश का एक कारगर ज़रिया मानते है। उन्होंने कहा हैः "साहित्य ओर राजनीति के कोई अलग-अलग खाने नहीं हैं।॰॰॰ जब कोई साहित्यकार राजनीति करेगा तो वह अधिक परिष्कृत होगी। कहीं कोई कवि यदि डिक्टेटर बन जाए तो वह निर्देषों के खून से अपने हाथ नहीं रँगेगा।"
ISBN-13
9788170283355
Language
Hindi
Binding
Hard Bound
Publisher
Rajpal & Sons
Publishing Date
1999
Product Edition
1
Total Pages
134

Kya Khoya Kya Paya

Rajpal & Sons (Publisher)
fictionfantasyyoung adultaward winning

Frequently bought together

Total for 3 items₹379₹405You save ₹26
Product Specifications
Book Summary
"राजनीति ने अटलजी की काव्य रसधारा को भले अवरूद्ध किया हो लेकिन काव्य ने उनकी राजनीति को बड़ी गहरी संवेदना से सँवारा है। दोनों के समन्वय को देखने-परखने की उनकी दृष्टि बिल्कुल साफ है। इतना ही नहीं, वे साहित्य को अधिनायकवादियों तक पर अंकुश का एक कारगर ज़रिया मानते है। उन्होंने कहा हैः "साहित्य ओर राजनीति के कोई अलग-अलग खाने नहीं हैं।॰॰॰ जब कोई साहित्यकार राजनीति करेगा तो वह अधिक परिष्कृत होगी। कहीं कोई कवि यदि डिक्टेटर बन जाए तो वह निर्देषों के खून से अपने हाथ नहीं रँगेगा।"
Book Specifications
ISBN-13
9788170283355
Language
Hindi
Binding
Hard Bound
Publisher
Rajpal & Sons
Publishing Date
1999
Product Edition
1
Total Pages
134