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Product Specifications
Book Summary
About the Book: Babri 2.0: Ek Patrakar Ki Diary Se
6 दिसंबर 2025। बेलडांगा, मुर्शिदाबाद। एक मैदान। एक ईंट। और 1992 की एक ऐसी
स्मृति, जो तीन दशक बाद भी भारतीय राजनीति को छोड़ने को तैयार नहीं। उस शाम वहाँ
खड़ी एक पत्रकार के पास कोई सनसनीख़ेज़ ख़बर नहीं थी। उसके पास थे—सवाल। क्या बंगाल
वह देख रहा है, जो कल पूरा भारत देखेगा? Babri 2.0 इसी सवाल के पीछे निकलती है।
पच्चीस वर्षों से बंगाल की राजनीति को ज़मीन से देखने वाली पत्रकार की यह यात्रा
आपको नंदीग्राम और सिंगूर से लेकर बशीरहाट, संदेशखाली और बेलडांगा तक ले जाती है।
भाजपा से तृणमूल तक, एआईएमआईएम
About the Book: Babri 2.0: Ek Patrakar Ki Diary Se
6 दिसंबर 2025। बेलडांगा, मुर्शिदाबाद। एक मैदान। एक ईंट। और 1992 की एक ऐसी
स्मृति, जो तीन दशक बाद भी भारतीय राजनीति को छोड़ने को तैयार नहीं। उस शाम वहाँ
खड़ी एक पत्रकार के पास कोई सनसनीख़ेज़ ख़बर नहीं थी। उसके पास थे—सवाल। क्या बंगाल
वह देख रहा है, जो कल पूरा भारत देखेगा? Babri 2.0 इसी सवाल के पीछे निकलती है।
पच्चीस वर्षों से बंगाल की राजनीति को ज़मीन से देखने वाली पत्रकार की यह यात्रा
आपको नंदीग्राम और सिंगूर से लेकर बशीरहाट, संदेशखाली और बेलडांगा तक ले जाती है।
भाजपा से तृणमूल तक, एआईएमआईएम